भारत की मशहूर आवाज़ों का दस्तावेजीकरण, ‘आवाज़ों के जुगनू’ का शुभारंभ
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IGNCA की ‘आवाज़ों के जुगनू’ पहल में रेडियो और वॉइस-ओवर जगत की 31 प्रतिष्ठित भारतीय आवाज़ों का दस्तावेजीकरण।
पुस्तक और स्वर प्रारूप में भारत की श्रव्य विरासत को संरक्षित करने की अनूठी सांस्कृतिक पहल।
डिजिटल युग में भी आवाज़ आधारित कहानी कहने की परंपरा की प्रासंगिकता को रेखांकित करता प्रकाशन।
दिल्ली/ भारत की समृद्ध श्रव्य विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक अनूठी पहल के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र 8 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘आवाज़ों के जुगनू’ परियोजना का शुभारंभ करेगा। यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें रेडियो, प्रसारण और वॉइस-ओवर की दुनिया से जुड़ी भारत की लोकप्रिय आवाज़ों को पुस्तक और स्वर प्रारूप में दस्तावेजीकृत किया जा रहा है।
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्था इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) भारत की लोकप्रिय और स्मरणीय आवाज़ों को संरक्षित करने के उद्देश्य से एक विशेष परियोजना ‘आवाज़ों के जुगनू’ का शुभारंभ करने जा रही है। इस पहल का औपचारिक लोकार्पण 8 जनवरी 2026 को शाम 4 बजे नई दिल्ली स्थित IGNCA परिसर में पुस्तक और स्वर दोनों प्रारूपों में किया जाएगा।
यह परियोजना भारत की उन चुनिंदा आवाज़ों को समर्पित है, जिन्होंने आकाशवाणी, एफएम रेडियो, प्रसारण माध्यमों, वॉइस-ओवर इंडस्ट्री और काव्य-पाठ की परंपरा के जरिए दशकों तक श्रोताओं से गहरा भावनात्मक संबंध बनाया। वर्षों की खोज, शोध और दुर्लभ ऑडियो-वीडियो संग्रह के अध्ययन के बाद इस प्रकाशन में कुल 31 प्रतिष्ठित स्वर व्यक्तित्वों के जीवन-सफर, अनुभव और योगदान को साक्षात्कारों तथा मूल प्रकाशनों के माध्यम से संकलित किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी करेंगे। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध प्रसारक और वॉइस-एक्टर श्री हरीश भिमानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि प्रसिद्ध प्रसारक श्री शम्मी नारंग विशिष्ट अतिथि होंगे। वॉइस-ओवर जगत की चर्चित हस्ती सुश्री सोनल कौशल विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लेंगी।
कार्यक्रम के दौरान IGNCA मीडिया सेंटर के कंट्रोलर श्री अनुराग पुनेठा स्वागत भाषण देंगे। वहीं इस पुस्तक की संकलनकर्ता और संपादक डॉ. शेफाली चतुर्वेदी प्रकाशन की अवधारणा, शोध प्रक्रिया और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालेंगी।
‘आवाज़ों के जुगनू’ परियोजना रेडियो और आवाज़ आधारित कहानी कहने की उस सांस्कृतिक परंपरा को रेखांकित करती है, जिसने पीढ़ियों तक श्रोताओं की स्मृतियों, भावनाओं और कल्पनाओं को आकार दिया है। यह प्रकाशन यह भी दर्शाता है कि कैसे केवल स्वर के माध्यम से कहानियों, पात्रों और संवेदनाओं को जीवंत किया गया और सामाजिक भरोसे व आत्मीयता का निर्माण हुआ।
डिजिटल युग के वर्तमान संदर्भ में भी यह पहल अत्यंत प्रासंगिक मानी जा रही है। तकनीकी बदलावों के बावजूद वॉइस-ओवर और रेडियो आज भी कहानी कहने के पारंपरिक और आधुनिक स्वरूपों के बीच एक सशक्त सेतु बने हुए हैं। इस परियोजना के माध्यम से आवाज़ की उस अनूठी शक्ति पर विचार किया जाएगा, जो दृश्य के बिना भी गहरी अनुभूति पैदा कर सकती है।
IGNCA द्वारा ‘आवाज़ों के जुगनू’ का शुभारंभ भारतीय श्रव्य विरासत के दस्तावेजीकरण और संरक्षण के प्रति संस्था की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम विद्वानों, कलाकारों और आम श्रोताओं के लिए भारत की समृद्ध वाचन और स्वर परंपरा से जुड़ने का एक सार्थक अवसर प्रदान करेगा।